जीत-हार क्षणिक है जानता हूँ,
लेकिन जीत को ही लक्ष्य अपना मानता हूँ,
अपनी कमजोरियो को जानता हूँ ,
हार जाने से नहीं घबराता हूँ,
पर एक बार जग पर छा जाना चाहता हूँ,
तभी तो बदल को अपना आदर्श मानता हूँ.
पर एक बार जग पर छा जाना चाहता हूँ,
तभी तो बदल को अपना आदर्श मानता हूँ.
विजयी हुंकार ऐसी हो,
सिंह की दहाड़ जैसी हो
चाहे क्षणिक ही ये गुबार हो ,
मगर मुझे इससे ही प्यार हो............